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समस्त कठिनाइयों का एक ही उद्गम है मानवीय दुर्बुद्धि। जिस उपाय से दुर्बुद्धि को हटाकर सदबुद्धि स्थापित की जा सके, वही मानव कल्याण का, विश्वशांति का मार्ग हो सकता है। युगऋषि परम पूज्य पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने वर्तमान युग की समस्याओं के समाधान हेतु बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं। उनहीं में से एक पुष्प यह भी है।





